सखि जस राम लखन कर जोटा
सखि जस राम लखन कर जोटा
चौपाई २, दोहा ३११ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सखि जस राम लखन कर जोटा। तैसेइ भूप संग दुइ ढोटा॥ स्याम गौर सब अंग सुहाए। ते सब कहहिं देखि जे आए॥ २ ॥
अर्थ
हे सखी! जैसा श्रीराम-लक्ष्मण का जोड़ा है, वैसे ही राजा के साथ और भी दो कुमार हैं। वे भी एक श्याम और दूसरे गौर वर्ण के हैं। उनके भी सब अंग बहुत सुन्दर हैं। जो लोग उन्हें देख आये हैं, वे सब यही कहते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत