सखी बचन सुनि भै परतीती
सखी बचन सुनि भै परतीती
चौपाई २, दोहा २५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती॥ तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही॥ २ ॥
अर्थ
सखी के वचन सुनकर रानी को [श्रीरामजी के सामर्थ्य के सम्बन्ध में] विश्वास हो गया। उनकी उदासी मिट गयी और श्रीरामजी के प्रति उनका प्रेम अत्यन्त बढ़ गया। उस समय श्रीरामचन्द्रजी को देखकर सीताजी भयभीत हृदय से जिस-तिस [देवता] से विनती कर रही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।
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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध