काम कुसुम धनु सायक लीन्हे

चौपाई १, दोहा २५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

काम कुसुम धनु सायक लीन्हे। सकल भुवन अपने बस कीन्हे॥ देबि तजिअ संसउ अस जानी। भंजब धनुषु राम सुनु रानी॥ १ ॥

अर्थ

कामदेव ने फूलों का ही धनुष-बाण लेकर समस्त लोकों को अपने वश में कर रखा है। हे देवी! ऐसा जानकर सन्देह त्याग दीजिये। हे रानी! सुनिये, रामचन्द्रजी धनुष को अवश्य ही तोड़ेंगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध