सकल बिघ्न ब्यापहिं नहिं तेही

चौपाई ३, दोहा ३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल बिघ्न ब्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥ सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई॥ ३ ॥

अर्थ

ये सारे विघ्न उसको नहीं व्यापते (बाधा नहीं देते) जिसे राम सुन्दर कृपा की दृष्टि से देखते हैं। वही आदरपूर्वक इस सरोवर में स्नान करता है और महान् भयानक त्रिताप से नहीं जलता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य