करि न जाइ सर मज्जन पाना
करि न जाइ सर मज्जन पाना
चौपाई २, दोहा ३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करि न जाइ सर मज्जन पाना। फिरि आवइ समेत अभिमाना॥ जौं बहोरि कोउ पूछन आवा। सर निंदा करि ताहि बुझावा॥ २ ॥
अर्थ
उससे उस सरोवर में स्नान और उसका जलपान तो किया नहीं जाता, वह अभिमान सहित लौट आता है। फिर यदि कोई उससे [वहाँ का हाल] पूछने आता है, तो वह [अपने अभाग्य की बात न कहकर] सरोवर की निन्दा करके उसे समझाता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य