ते नर यह सर तजहिं न

चौपाई ४, दोहा ३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ते नर यह सर तजहिं न काऊ। जिन्ह कें राम चरन भल भाऊ॥ जो नहाइ चह एहिं सर भाई। सो सतसंग करउ मन लाई॥ ४ ॥

अर्थ

जिनके मन में श्रीरामचन्द्रजी के चरणों में सुन्दर प्रेम है, वे इस सरोवर को कभी नहीं छोड़ते। हे भाई! जो इस सरोवर में स्नान करना चाहे वह मन लगाकर सत्संग करे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मानस का रूप और माहात्म्य