सैल सकल जहँ लगि जग माहीं

चौपाई २, दोहा ९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं॥ बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा॥ २ ॥

अर्थ

जगत् में जितने छोटे-बड़े पर्वत थे, जिनका वर्णन करके सिर नहीं आता तथा जितने वन, समुद्र, नदियाँ और तालाब थे, हिमाचल ने सबको न्योता भेजा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात