जस दूलहु तसि बनी बराता
जस दूलहु तसि बनी बराता
चौपाई १, दोहा ९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता॥ इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना॥ १ ॥
अर्थ
जैसा दूल्हा है, वैसी ही बरात बन गयी है। मार्ग में चलते हुए भाँति-भाँति के कौतुक होते जाते हैं। इधर हिमाचल ने ऐसा विचित्र वितान बनाया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात