सहजहिं चले सकल जग स्वामी

चौपाई ३, दोहा २५५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी॥ चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी॥ ३ ॥

अर्थ

समस्त जगत् के स्वामी श्रीरामजी सुन्दर मतवाले श्रेष्ठ हाथी की-सी चाल से स्वाभाविक ही चले। श्रीरामचन्द्रजी के चलते ही नगर भर के सब स्त्री-पुरुष सुखी हो गये और उनके शरीर रोमांच से भर गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध