भए बिसोक कोक मुनि देवा

चौपाई २, दोहा २५५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा॥ गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा॥ २ ॥

अर्थ

मुनि और देवतारूपी चकवे शोकरहित हो गये। वे फूल बरसाकर अपनी सेवा प्रकट कर रहे हैं। प्रेमसहित गुरु के चरणों की वन्दना करके श्रीरामचन्द्रजी ने मुनियों से आज्ञा माँगी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध