सहज मनोहर मूरति दोऊ
सहज मनोहर मूरति दोऊ
चौपाई १, दोहा २४३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सहज मनोहर मूरति दोऊ। कोटि काम उपमा लघु सोऊ॥ सरद चंद निंदक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी के॥ १ ॥
अर्थ
दोनों मूर्तियाँ स्वभाव से ही (बिना किसी बनाव-श्रृंगार के) मन को हरनेवाली हैं। करोड़ों कामदेवों की उपमा भी उनके लिये तुच्छ है। उनके सुन्दर मुख शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा की भी निन्दा करनेवाले हैं और कमल के समान नेत्र मन को बहुत ही भाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश