साचेहुँ उन्ह कें मोह न माया
साचेहुँ उन्ह कें मोह न माया
चौपाई २, दोहा ९७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
साचेहुँ उन्ह कें मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया॥ पर घर घालक लाज न भीरा। बाँझ कि जान प्रसव कै पीरा॥ २ ॥
अर्थ
सचमुच उनके न किसी का मोह है, न माया; न धन है, न घर है। वे सबसे उदासीन हैं; इसी से वे दूसरे का घर उजाड़ने वाले हैं। उन्हें न किसी की लाज है, न भीर है। भला, बाँझ स्त्री प्रसव की पीड़ा को क्या जाने।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात