नारद कर मैं काह बिगारा
नारद कर मैं काह बिगारा
चौपाई १, दोहा ९७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नारद कर मैं काह बिगारा। भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा॥ अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा। बौरे बरहि लागि तपु कीन्हा॥ १ ॥
अर्थ
मैंने नारद का क्या बिगाड़ा था, जिन्होंने मेरा बसता हुआ घर उजाड़ दिया और जिन्होंने पार्वती को ऐसा उपदेश दिया कि जिससे उसने बावले वर के लिए तप किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात