एक अनीह अरूप अनामा
एक अनीह अरूप अनामा
चौपाई २, दोहा १३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा॥ ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना॥ २ ॥
अर्थ
जो परमेश्वर एक हैं, जिनकी कोई इच्छा नहीं है, जिनका कोई रूप और नाम नहीं है, जो अजन्मा, सच्चिदानन्द और परमधाम हैं और जो सबमें व्यापक एवं विश्वरूप हैं, उन्हीं भगवान् ने दिव्य शरीर धारण करके नाना प्रकार की लीला की है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।
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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता