सब बिधि सकल अलंकृत कीन्ही
सब बिधि सकल अलंकृत कीन्ही
चौपाई २, दोहा ३३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सब बिधि सकल अलंकृत कीन्ही। मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्ही॥ करत बिनय बहु बिधि नरनाहू। लहेउँ आजु जगजीवन लाहू॥ २ ॥
अर्थ
उन सबको सब प्रकार से [गहनों-कपड़ों से] सजाकर राजा ने प्रसन्न होकर भूदेव ब्राह्मणों को दिया। राजा बहुत तरह से विनती कर रहे हैं कि जगत् में मैंने आज ही जीने का लाभ पाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह