दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे

चौपाई १, दोहा ३३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे॥ चारि लच्छ बर धेनु मगाईं। काम सुरभि सम सील सुहाईं॥ १ ॥

अर्थ

राजा ने सबको दण्डवत्‌ प्रणाम किया और प्रेमसहित पूजन करके उन्हें उत्तम आसन दिये। चार लाख उत्तम गायें मँगवायीं, जो कामधेनु के समान अच्छे स्वभाववाली और सुहावनी थीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह