पाइ असीस महीसु अनंदा
पाइ असीस महीसु अनंदा
चौपाई ३, दोहा ३३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा॥ कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन॥ ३ ॥
अर्थ
[ब्राह्मणों से] आशीर्वाद पाकर राजा आनन्दित हुए। फिर याचकों के समूहों को बुलवा लिया और सबको उनकी रुचि पूछकर सोना, वस्त्र, मणि, घोड़ा, हाथी और रथ (जिसने जो चाहा सो) सूर्यकुल को आनन्दित करने वाले दशरथजी ने दिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह