सब बिधि पुरी मनोहर जानी
सब बिधि पुरी मनोहर जानी
चौपाई ३, दोहा ३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी॥ बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा॥ ३ ॥
अर्थ
इस अयोध्यापुरी को सब प्रकार से मनोहर, सब सिद्धियों की देनेवाली और कल्याण की खान समझकर मैंने इस निर्मल कथा का आरम्भ किया, जिसके सुनने से काम, मद और दम्भ नष्ट हो जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य