राम धामदा पुरी सुहावनि

चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि॥ चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजें तनु नहिं संसारा॥ २ ॥

अर्थ

यह शोभायमान अयोध्यापुरी श्रीरामचन्द्रजी के परमधाम की देनेवाली है, सब लोकों में प्रसिद्ध है और अत्यन्त पवित्र है। जगत् में [अण्डज, स्वेदज, उद्भिज्ज और जरायुज] चार खानि (प्रकार) के अनन्त जीव हैं, इनमें से जो कोई भी अयोध्याजी में शरीर छोड़ते हैं वे फिर संसार में नहीं आते (जन्म-मृत्यु के चक्कर से छूटकर भगवान् के परमधाम में निवास करते हैं)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मानस का रूप और माहात्म्य