रामचरितमानस एहि नामा
रामचरितमानस एहि नामा
चौपाई ४, दोहा ३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा॥ मन करि बिषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौं एहिं सर परई॥ ४ ॥
अर्थ
इसका नाम रामचरितमानस है, जिसके कानों से सुनते ही शान्ति मिलती है। मनरूपी हाथी विषय-रूपी दावानल में जल रहा है, वह यदि इस रामचरितमानस रूपी सरोवर में आ पड़े तो सुखी हो जाय।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य