रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी
रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी
चौपाई १, दोहा ७८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी॥ बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी॥ १ ॥
अर्थ
ऋषियों ने [वहाँ जाकर] पार्वती को कैसी देखा, मानो मूर्तिमान् तपस्या ही हो। मुनि बोले-- हे शैलकुमारी! सुनो, तुम किसलिए इतना कठोर तप कर रही हो?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती