पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा
पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा
दोहा ७७ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु। गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु॥ ७७ ॥
अर्थ
आप लोग पार्वती के पास जाकर उनके प्रेम की परीक्षा लीजिये और हिमाचल को कहकर [उन्हें पार्वती को लिवा लाने के लिये भेजिये तथा] पार्वती को घर भिजवाइये और उनके सन्देह को दूर कीजिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध” प्रकरण का दोहा ७७ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवजी को पार्वती से विवाह करने के अनुरोध और शिवजी की सहर्ष स्वीकृति का वर्णन है।
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राम का शिवजी से विवाह-अनुरोध