केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू
केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू
चौपाई २, दोहा ७८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू॥ कहत बचन मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई॥ २ ॥
अर्थ
तुम किसकी आराधना करती हो और क्या चाहती हो? हमसे अपना सच्चा भेद क्यों नहीं कहतीं? [पार्वती ने कहा--] बात कहते मन बहुत सकुचाता है। आप लोग मेरी मूर्खता सुनकर हँसेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।
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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती