रावन मरन मनुज कर जाचा
रावन मरन मनुज कर जाचा
चौपाई १, दोहा ४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा॥ जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा॥ १ ॥
अर्थ
रावण ने [ब्रह्माजी से] अपनी मृत्यु मनुष्य के हाथ से माँगी थी। ब्रह्माजी के वचनों को प्रभु सत्य करना चाहते हैं। मैं जो पास नहीं जाता हूँ तो बड़ा पछतावा रह जायगा। इस प्रकार शिवजी विचार करते थे, परन्तु कोई भी युक्ति ठीक नहीं बैठती थी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य