एहि बिधि भए सोचबस ईसा
एहि बिधि भए सोचबस ईसा
चौपाई २, दोहा ४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि बिधि भए सोचबस ईसा। तेही समय जाइ दससीसा॥ लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा॥ २ ॥
अर्थ
इस प्रकार महादेवजी चिन्ता के वश हो गये। उसी समय नीच रावण ने जाकर मारीच को साथ लिया और वह (मारीच) तुरंत कपटमृग बन गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य