रावन बान छुआ नहिं चापा

चौपाई २, दोहा २५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा॥ सो धनु राजकुअँर कर देहीं। बाल मराल कि मंदर लेहीं॥ २ ॥

अर्थ

रावण और बाणासुर ने जिस धनुष को छुआ तक नहीं और सब राजा घमंड करके हार गये, वही धनुष इस सुकुमार राजकुमार के हाथ में दे रहे हैं। हंस के बच्चे भी कहीं मन्दराचल पहाड़ उठा सकते हैं?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध