रामचरितमानस मुनि भावन
रामचरितमानस मुनि भावन
चौपाई ५, दोहा ३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामचरितमानस मुनि भावन। बिरचेउ संभु सुहावन पावन॥ त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन। कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन॥ ५ ॥
अर्थ
यह रामचरितमानस मुनियों का प्रिय है, इस सुहावने और पवित्र मानस की शिवजी ने रचना की। यह तीनों प्रकार के दोषों, दुःखों और दरिद्रता तथा कलियुग की कुचालों और सब पापों का नाश करनेवाला है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य