रचि महेस निज मानस राखा

चौपाई ६, दोहा ३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा॥ तातें रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर॥ ६ ॥

अर्थ

श्रीमहादेवजी ने इसको रचकर अपने मन में रखा था और सुअवसर पाकर पार्वतीजी से कहा। इसीसे शिवजी ने इसको अपने हृदय में देखकर और प्रसन्न होकर इसका सुन्दर 'रामचरितमानस' नाम रखा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य