जुग बिच भगति देवधुनि धारा
जुग बिच भगति देवधुनि धारा
चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा॥ त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरूप सिंधु समुहानी॥ २ ॥
अर्थ
दोनोंके बीचमें भक्तिरूपी गङ्गाजी की धारा ज्ञान और वैराग्य के सहित शोभित हो रही है। ऐसी तीनों तापों को डरानेवाली यह तिमुहानी नदी रामस्वरूपरूपी समुद्र की ओर जा रही है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य