रामरूप राकेसु निहारी

चौपाई २, दोहा २६२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी॥ बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना॥ २ ॥

अर्थ

रामरूपी पूर्णचन्द्र को देखकर पुलकावलीरूपी भारी लहरें बढ़ने लगीं। आकाश में बड़े जोर से नगाड़े बजने लगे और देवबधुएँ गान करके नाचने लगीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।

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धनुषभंग