ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा

चौपाई ३, दोहा २६२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहिं देहिं असीसा॥ बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला॥ ३ ॥

अर्थ

ब्रह्मा आदि देवता, सिद्ध और मुनीश्वर प्रभु की प्रशंसा कर रहे हैं और आशीर्वाद दे रहे हैं। वे रंग-बिरंगे फूल और मालाएँ बरसा रहे हैं। किन्नर लोग रसीले गीत गा रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।

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धनुषभंग