राम सो परमातमा भवानी

चौपाई ३, दोहा ११९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी॥ अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं॥ ३ ॥

अर्थ

हे पार्वती! वही परमात्मा श्रीरामचन्द्रजी हैं। उनमें भ्रम [देखने में आता] है, तुम्हारा ऐसा कहना अत्यन्त ही अनुचित है। इस प्रकार का सन्देह मन में लाते ही मनुष्य के ज्ञान, वैराग्य आदि सारे सद्गुण नष्ट हो जाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद