राम सकुल रन रावनु मारा

चौपाई ३-४, दोहा २५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम सकुल रन रावनु मारा। सीय सहित निज पुर पगु धारा॥ राजा रामु अवध रजधानी। गावत गुन सुर मुनि बर बानी॥ सेवक सुमिरत नामु सप्रीती। बिनु श्रम प्रबल मोह दलु जीती॥ फिरत सनेहँ मगन सुख अपनें। नाम प्रसाद सोच नहिं सपनें॥ ३-४ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कुटुम्ब सहित रावण को युद्ध में मारा, तब सीता सहित उन्होंने अपने नगर (अयोध्या) में प्रवेश किया। राम राजा हुए, अवध उनकी राजधानी हुई, देवता और मुनि सुन्दर वाणी से जिनके गुण गाते हैं। परंतु सेवक (भक्त) प्रेमपूर्वक नाम के स्मरणमात्र से बिना परिश्रम मोह की प्रबल सेना को जीतकर प्रेम में मग्न हुए अपने ही सुख में विचरते हैं, नाम के प्रसाद से उन्हें सपने में भी कोई चिन्ता नहीं सताती।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३-४, दोहा २५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा