ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर
ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर
दोहा २५ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि। रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि॥ २५ ॥
अर्थ
इस प्रकार नाम [निर्गुण] ब्रह्म और [सगुण] राम दोनों से बड़ा है। यह वरदान देने वालों को भी वर देने वाला है। श्रीशिवजी ने अपने हृदय में यह जानकर ही सौ करोड़ रामचरितों में से इस 'राम' नाम को [साररूप से चुनकर] ग्रहण किया है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का दोहा २५ है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा