राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं

दोहा ३१५ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि। पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि॥ ३१५ ॥

अर्थ

नख से शिखा तक श्रीरामचन्द्रजी के सुन्दर रूप को बार-बार देखते हुए पार्वतीजी सहित श्रीशिवजी का शरीर पुलकित हो गया और उनके नेत्र [प्रेमाश्रुओं के] जल से भर गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का दोहा ३१५ है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत