एक बार करतल बर बीना
एक बार करतल बर बीना
चौपाई २, दोहा १२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना॥ छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा॥ २ ॥
अर्थ
एक बार गानविद्या में निपुण मुनिनाथ नारदजी हाथ में सुन्दर वीणा लिये, हरिगुण गाते हुए क्षीरसागर को गये, जहाँ वेदों के मस्तकस्वरूप (मूर्तिमान् वेदान्ततत्त्व) लक्ष्मीनिवास भगवान् नारायण रहते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।
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नारद का अभिमान और माया