राम चरित अति अमित मुनीसा

चौपाई २, दोहा १०५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम चरित अति अमित मुनीसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा॥ तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी॥ २ ॥

अर्थ

हे मुनीश! रामचरित्र अत्यन्त अपार है। सौ करोड़ शेषजी भी उसे नहीं कह सकते। तथापि जैसा मैंने सुना है, वैसा वाणी के स्वामी (प्रेरक) और हाथ में धनुष लिये हुए प्रभु श्रीरामचन्द्रजी का स्मरण करके कहता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
शिवजी का विवाह