राम बिदा मागत कर जोरी
राम बिदा मागत कर जोरी
चौपाई २, दोहा ३३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी॥ पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई॥ २ ॥
अर्थ
तब श्रीरामचन्द्रजी ने हाथ जोड़कर विदा माँगते हुए बार-बार प्रणाम किया। आशीर्वाद पाकर और फिर सिर नवाकर भाइयों सहित श्रीरघुनाथजी चले।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह