मंजु मधुर मूरति उर आनी

चौपाई ३, दोहा ३३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मंजु मधुर मूरति उर आनी। भईं सनेह सिथिल सब रानी॥ पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारीं। बार बार भेटहिं महतारीं॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामजी की सुन्दर मधुर मूर्ति को हृदय में लाकर सब रानियाँ स्नेह से शिथिल हो गयीं। फिर धीरज धरकर कुमारियों को बुलाकर माताएँ बारंबार उन्हें [गले लगाकर] भेंटने लगीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह