राम भगत हित नर तनु धारी

चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी॥ नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने भक्तों के हित के लिये मनुष्य-शरीर धारण करके स्वयं कष्ट सहकर साधुओं को सुखी किया; परन्तु भक्तगण प्रेम के साथ नाम का जप करते हुए सहज ही में आनन्द और कल्याण के घर हो जाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
रामनाम की महिमा