राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने

चौपाई ३, दोहा २७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने। कहि कछु लखनु बहुरि मुसुकाने॥ हँसत देखि नख सिख रिसब्यापी। राम तोर भ्राता बड़ पापी॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के वचन सुनकर वे कुछ ठंडे पड़े। इतने में लक्ष्मणजी कुछ कहकर फिर मुसकरा दिये। उनको हँसते देखकर परशुरामजी के नख से शिखा तक क्रोध छा गया। उन्होंने कहा--हे राम! तेरा भाई बड़ा पापी है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद