जौं लरिका कछु अचगरि करहीं
जौं लरिका कछु अचगरि करहीं
चौपाई २, दोहा २७७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु मोद मन भरहीं॥ करिअ कृपा सिसु सेवक जानी। तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी॥ २ ॥
अर्थ
बालक यदि कुछ चपलता भी करते हैं, तो गुरु, पिता और माता के मन में आनन्द भर जाता है। अतः इसे छोटा बच्चा और सेवक जानकर कृपा कीजिये। आप तो समदर्शी, सुशील, धीर और ज्ञानी मुनि हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद