राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी
राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी
चौपाई २, दोहा १२१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी॥ तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना॥ २ ॥
अर्थ
हे सयानी! सुनो, हमारा मत तो यह है कि बुद्धि, मन और वाणी से श्रीरामचन्द्रजी की तर्कना नहीं की जा सकती। तथापि संत, मुनि, वेद और पुराण अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार जैसा कुछ कहते हैं,
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु