राजन रामु अतुलबल जैसें
राजन रामु अतुलबल जैसें
चौपाई २, दोहा २९३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें॥ कंपहिं भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें॥ २ ॥
अर्थ
हे राजन्! जैसे श्रीरामचन्द्रजी अतुलनीय बली हैं, वैसे ही तेजनिधान लक्ष्मणजी भी हैं, जिनके देखने मात्र से राजालोग ऐसे काँप उठते थे, जैसे हाथी सिंह के बच्चे को ताकने से काँप उठते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
जनक का दूत, बारात का प्रस्थान