देव देखि तव बालक दोऊ
देव देखि तव बालक दोऊ
चौपाई ३, दोहा २९३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ॥ दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी॥ ३ ॥
अर्थ
हे देव! आपके दोनों बालकों को देखने के बाद अब आँख के नीचे कोई आता ही नहीं। प्रेम, प्रताप और वीर-रस में पगी हुई दूतों की वचनरचना सबको बहुत प्रिय लगी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
जनक का दूत, बारात का प्रस्थान