सुनि सरोष भृगुनायकु आए

चौपाई १, दोहा २९३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए॥ देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा॥ १ ॥

अर्थ

धनुष टूटने की बात सुनकर परशुरामजी क्रोधभरे आये और उन्होंने बहुत प्रकार से आँखें दिखलायीं। देख कर श्रीराम का बल, उन्होंने अपना धनुष दे दिया और बहुत प्रकार से विनती करके वन को गमन किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान