रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते
रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते
दोहा १३३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ। बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ॥ १३३ ॥
अर्थ
वहाँ दो शिवजी के गण भी थे। वे सब भेद जानते थे और ब्राह्मण के वेष में सारी लीला देखते-फिरते थे। वे भी बड़े मौजी थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३३ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग