मुनि हित कारन कृपानिधाना

चौपाई ४, दोहा १३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना॥ सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा॥ ४ ॥

अर्थ

कृपानिधान भगवान् ने मुनि के कल्याण के लिए उन्हें ऐसा कुरूप बना दिया कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता; पर यह चरित कोई भी न जान सका। सबने उन्हें नारद ही जानकर प्रणाम किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग