कपिपति रीछ निसाचर राजा
कपिपति रीछ निसाचर राजा
चौपाई १, दोहा १८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा॥ बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए॥ १ ॥
अर्थ
वानरों के राजा सुग्रीवजी, रीछों के राजा जाम्बवानजी, राक्षसों के राजा विभीषणजी और अंगदजी आदि जितने वानरों का समाज है, सबके सुन्दर चरणों की मैं वन्दना करता हूँ, जिन्होंने अधम शरीर में भी श्रीरामचन्द्रजी को प्राप्त कर लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना