पुर अरु ब्योम बाजने बाजे

चौपाई १, दोहा २६५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुर अरु ब्योम बाजने बाजे। खल भए मलिन साधु सब राजे॥ सुर किंनर नर नाग मुनीसा। जय जय जय कहि देहिं असीसा॥ १ ॥

अर्थ

नगर और आकाश में बाजे बजने लगे। दुष्ट लोग उदास हो गये और सज्जन लोग सब प्रसन्न हो गये। देवता, किन्नर, मनुष्य, नाग और मुनीश्वर जय-जयकार करके आशीर्वाद दे रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना